हड़प्पा सभ्यता केवल कृषि तक सीमित नहीं थी; यह अपने उच्च कोटि के शिल्प उत्पादन (Craft Production) और दूर-दराज के क्षेत्रों के साथ अपने जटिल व्यापारिक नेटवर्कों के लिए भी जानी जाती थी। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि हड़प्पावासी किस प्रकार के शिल्पों का निर्माण करते थे, इसके लिए कच्चा माल कहाँ से लाते थे और सुदूर देशों (जैसे ओमान और मेसोपोटामिया) के साथ उनके कैसे व्यापारिक संबंध थे।
शिल्प उत्पादन के केंद्र: चन्हुदड़ो (Centers of Craft Production: Chanhudaro)
यद्यपि मोहनजोदड़ो एक विशाल शहर (125 हेक्टेयर) था, लेकिन शिल्प उत्पादन के मामले में चन्हुदड़ो नामक एक बहुत छोटी बस्ती (केवल 7 हेक्टेयर) सबसे महत्वपूर्ण थी। यह बस्ती लगभग पूरी तरह से शिल्प कार्यों में लगी हुई थी। यहाँ के मुख्य शिल्प कार्यों में शामिल थे:
- मनके (Beads) बनाना
- शंख (Shell) की कटाई
- धातु कर्म (Metal-working)
- मुहर निर्माण (Seal making) और बाट (Weights) बनाना
मनके बनाने की कला और कच्चे माल की विविधता (Bead Making and Materials)
हड़प्पावासी मनके बनाने में अत्यंत निपुण थे। वे विभिन्न प्रकार के सामग्रियों का उपयोग करते थे:
- पत्थर: कार्नीलियन (सुंदर लाल रंग का), जैस्पर, स्फटिक, क्वार्ट्ज और सेलखड़ी (Steatite)।
- धातुएं: तांबा, कांसा और सोना।
- अन्य: शंख, फयॉन्स और पकी मिट्टी (Terracotta)।
- तकनीक: सेलखड़ी एक बहुत मुलायम पत्थर था, जिसके चूर्ण (पाउडर) का लेप सांचे में ढालकर मनके बनाए जाते थे। कार्नीलियन का लाल रंग पीले रंग के कच्चे माल को आग में पकाकर प्राप्त किया जाता था। चन्हुदड़ो, लोथल और धौलावीरा से मनकों में छेद करने के विशेष उपकरण मिले हैं।
कच्चा माल प्राप्त करने की रणनीतियाँ (Strategies for Procuring Raw Materials)
चूंकि हड़प्पावासियों को शिल्प के लिए बहुत से कच्चे माल की आवश्यकता होती थी, उन्होंने इसे प्राप्त करने की विभिन्न रणनीतियां अपनाई थीं:
- बस्तियों की स्थापना: उन्होंने नागेश्वर और बालाकोट जैसे समुद्र तट के समीप बस्तियां बसाईं जहाँ से शंख आसानी से उपलब्ध था। इसी तरह, अफगानिस्तान में शोर्तुघई की स्थापना की गई जो नीले रंग के कीमती पत्थर लाजवर्द मणि (Lapis Lazuli) के सबसे अच्छे स्रोत के निकट था। गुजरात का लोथल कार्नीलियन पत्थर के स्रोत के पास था।
- सुदूर अभियानों द्वारा: राजस्थान के खेतड़ी अंचल (तांबे के लिए) और दक्षिण भारत (सोने के लिए) में अभियान भेजे गए। खेतड़ी क्षेत्र में मिली संस्कृति को पुरातत्वविदों ने ‘गणेश्वर-जोधपुरा संस्कृति’ का नाम दिया है, जहाँ से हड़प्पावासियों को तांबा प्राप्त होता था।
सुदूर व्यापारिक संपर्क: ओमान और मेसोपोटामिया (Distant Trade Contacts)
हड़प्पावासियों के व्यापारिक नेटवर्क भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर तक फैले हुए थे:
- ओमान: हाल की पुरातात्विक खोजों से पता चलता है कि तांबा संभवतः अरब प्रायद्वीप के दक्षिण-पूर्व छोर पर स्थित ओमान से लाया जाता था। रासायनिक विश्लेषण बताते हैं कि ओमानी तांबे और हड़प्पाई वस्तुओं दोनों में ‘निकल’ (Nickel) के अंश मिले हैं। ओमान में एक बड़ा हड़प्पाई मर्तबान (Jar) भी मिला है, जिस पर काली मिट्टी की मोटी परत चढ़ी थी, जिसका संभवतः ओमानी तांबे से विनिमय (Exchange) किया जाता था।
- मेसोपोटामिया और दिलमुन: तीसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व के मेसोपोटामिया के लेखों में ‘मगान’ (संभवतः ओमान), ‘दिलमुन’ (बहरीन द्वीप) और ‘मेलुहा’ (Meluhha) नामक क्षेत्रों से व्यापार का उल्लेख है। पुरातत्वविदों का मानना है कि ‘मेलुहा’ हड़प्पाई क्षेत्र के लिए प्रयुक्त नाम था। मेसोपोटामिया के लेख मेलुहा को “नाविकों का देश” कहते हैं। यहाँ से वे कार्नीलियन, लाजवर्द मणि, तांबा, सोना और विभिन्न लकड़ियाँ मंगवाते थे। बहरीन (दिलमुन) के स्थानीय बाट भी हड़प्पाई मानक का अनुसरण करते थे, जो गहरे व्यापारिक प्रभाव को दर्शाता है।
Note: अध्याय के संदर्भ NCERT कक्षा 12वीं की इतिहास की पुस्तक ‘भारतीय इतिहास के कुछ विषय (भाग-1)’ से लिए गए हैं। UPSC सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में इस पुस्तक को आधार माना जाता है और इससे संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तरी (Q&A) - हड़प्पा सभ्यता (भाग 3)
1 प्राचीन मेसोपोटामिया के लेखों में हड़प्पाई क्षेत्र (नाविकों के देश) के लिए किस शब्द का प्रयोग किया गया है?
2 हड़प्पा सभ्यता का कौन सा पुरास्थल लगभग पूरी तरह से शिल्प-उत्पादन (विशेषकर मनके बनाने) के लिए समर्पित था?
3 अफगानिस्तान का 'शोर्तुघई' पुरास्थल किस बहुमूल्य पत्थर के स्रोत के निकट स्थित था?
4 रासायनिक विश्लेषण के अनुसार, हड़प्पाई वस्तुओं और ओमानी तांबे दोनों में किस धातु के अंश मिले हैं, जो व्यापार का संकेत देते हैं?
5 हड़प्पावासी 'शंख' (Shell) प्राप्त करने के लिए मुख्य रूप से किन तटीय बस्तियों पर निर्भर थे?
6 हड़प्पा सभ्यता के लोग तांबा प्राप्त करने के लिए किस क्षेत्र में अभियान भेजते थे?