Harappan Civilization Part 1 in Hindi
इतिहास और राजनीती (History and Politics)

हड़प्पा सभ्यता (भाग 1): आरंभ, भौगोलिक विस्तार और निर्वाह के तरीके

“हड़प्पा सभ्यता” को सिंधु घाटी सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है। हड़प्पा शब्द उस स्थान से लिया गया है जहाँ सबसे पहले इस महान सभ्यता की पहचान की गई थी। परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह प्राचीन भारतीय इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इस सभ्यता को इसकी विशिष्ट पुरावस्तुओं जैसे मुहरों, मनकों, बाटों, पकी ईंटों, जल निकास प्रणाली और उन्नत शहरी जीवन के लिए जाना जाता है। इस ब्लॉग में, हम हड़प्पा सभ्यता की शुरुआत, इसके विशाल भौगोलिक फैलाव और उन तरीकों का विस्तार से अध्ययन करेंगे जिनके माध्यम से यहाँ के निवासी अपना जीवन निर्वाह करते थे।

सभ्यता का आरंभ और कालक्रम (Origins and Timeline)

हड़प्पा सभ्यता का क्रमिक विकास हुआ और इसके पूरे समय काल को मुख्य रूप से तीन चरणों में विभाजित किया जाता है। हाल के पुरातात्विक साक्ष्य 7000 ईसा पूर्व के शुरुआती कृषक समुदायों से हड़प्पा संस्कृति के उद्भव का संकेत देते हैं, लेकिन इस सभ्यता का कुल समय काल मुख्य रूप से 6000 ईसा पूर्व से 1300 ईसा पूर्व तक माना जाता है:

  • प्रारंभिक हड़प्पा (6000 ईसा पूर्व – 2600 ईसा पूर्व): इस क्षेत्र में विकसित हड़प्पा से पहले भी कई संस्कृतियाँ अस्तित्व में थीं। ये संस्कृतियाँ अपनी विशिष्ट मृदभांड शैली से संबद्ध थीं। इस समय कृषि, पशुपालन और कुछ शिल्पकारी के साक्ष्य मिलते हैं। बस्तियाँ आमतौर पर छोटी होती थीं और बड़े आकार की संरचनाएँ लगभग न के बराबर थीं।
  • परिपक्व हड़प्पा (2600 ईसा पूर्व – 1900 ईसा पूर्व): यह सभ्यता का ‘शहरी चरण’ था और इसे सबसे समृद्ध काल माना जाता है। शहरी चरण वास्तव में प्रारंभिक हड़प्पा चरण में हुए क्रमिक परिवर्तन और आंतरिक विकास का ही परिणाम था।
  • उत्तर हड़प्पा (1900 ईसा पूर्व – 1300 ईसा पूर्व): 1900 ईसा पूर्व के आसपास इस महान सभ्यता का पतन शुरू हो गया था। 1900 से 1300 ईसा पूर्व तक के इस पतन के चरण को ‘उत्तर हड़प्पा’ या अनुवर्ती संस्कृतियाँ कहा जाता है, जहाँ शहरी जीवनशैली का स्थान एक ग्रामीण जीवनशैली ने ले लिया था।

भौगोलिक विस्तार और प्रमुख स्थल (Geographical Spread and Major Sites)

हड़प्पा सभ्यता का विस्तार अत्यंत व्यापक था। इसके साक्ष्य केवल आधुनिक भारत ही नहीं, बल्कि अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, सिंध और पाकिस्तान के पंजाब प्रांतों तक फैले हुए हैं। भारत में इसके अवशेष जम्मू, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग, गुजरात और महाराष्ट्र से प्राप्त हुए हैं।

अब तक भारतीय उपमहाद्वीप में 2000 से अधिक हड़प्पा पुरातात्विक स्थल खोजे जा चुके हैं। इनमें से अधिकांश स्थल सिंधु और सरस्वती नदी घाटियों के बीच स्थित हैं। यह तथ्य बहुत महत्वपूर्ण है कि लगभग दो-तिहाई (2/3) बस्तियाँ सरस्वती बेसिन में पाई गई हैं, जो इसके अत्यधिक पुरातात्विक महत्व को दर्शाता है।

इस विशाल सभ्यता में मुख्य रूप से पाँच प्रमुख शहरों की पहचान की गई है:

  1. राखीगढ़ी (भारत)
  2. मोहनजोदड़ो (पाकिस्तान)
  3. हड़प्पा (पाकिस्तान)
  4. धौलावीरा (भारत)
  5. गन्वेरीवाला (पाकिस्तान)

शेष बस्तियाँ क्षेत्रीय केंद्र, कृषि गाँव, बंदरगाह और विनिर्माण (शिल्प) केंद्र जैसी विभिन्न श्रेणियों में विभाजित थीं।

निर्वाह के तरीके: कृषि और आहार (Subsistence Strategies: Agriculture and Diet)

विकसित हड़प्पा संस्कृति कुछ ऐसे स्थानों पर पनपी जहाँ पहले आरंभिक संस्कृतियाँ अस्तित्व में थीं। हड़प्पा सभ्यता के निवासी अपने निर्वाह के लिए विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों से प्राप्त उत्पादों और जानवरों (जिसमें मछली भी शामिल है) का भोजन के रूप में उपयोग करते थे।

  • वनस्पति और अनाज: पुरा-वनस्पतिज्ञों ने जले हुए अनाज के दानों और बीजों की खोज से उनके आहार संबंधी आदतों की जानकारी प्राप्त की है। हड़प्पा स्थलों से गेहूँ, जौ, दाल, सफेद चना और तिल के दाने मिले हैं। बाजरे के दाने मुख्य रूप से गुजरात के स्थलों से प्राप्त हुए हैं। चावल के दाने अपेक्षाकृत बहुत कम पाए गए हैं।
  • पशुपालन और मांसाहार: पुरा-प्राणीविज्ञानियों द्वारा किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि हड़प्पावासी जानवरों को पालते थे। हड़प्पा स्थलों से मिली जानवरों की हड्डियों में मवेशियों (गाय/बैल), भेड़, बकरी, भैंस और सूअर की हड्डियाँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, वराह (जंगली सूअर), हिरण और घड़ियाल जैसी जंगली प्रजातियों की हड्डियाँ भी मिली हैं। मछली और पक्षियों की हड्डियाँ भी प्राप्त हुई हैं।

कृषि प्रौद्योगिकी और सिंचाई (Agricultural Technology and Irrigation)

यद्यपि अनाजों की प्राप्ति से कृषि के स्पष्ट संकेत मिलते हैं, लेकिन वास्तविक कृषि विधियों को समझना थोड़ा कठिन है। फिर भी, पुरातात्विक साक्ष्यों ने उनकी उन्नत कृषि तकनीकों पर प्रकाश डाला है:

  • हल और बैल का प्रयोग: मुहरों पर किए गए वृषभ (बैल) के रेखांकन और मिट्टी की मूर्तियां (टेराकोटा) यह इंगित करती हैं कि उन्हें वृषभ की अच्छी जानकारी थी, और खेत जोतने के लिए बैलों का प्रयोग होता था। चोलिस्तान के कई स्थलों और बनावली (हरियाणा) से मिट्टी के बने हल के प्रतिरूप (मॉडल्स) मिले हैं।
  • दोहरी फसल प्रणाली: पुरातत्वविदों को कालीबंगन (राजस्थान) नामक स्थान पर प्रारंभिक हड़प्पा स्तरों से जुड़े जुते हुए खेत का साक्ष्य मिला है। इस खेत में हल रेखाओं के दो समूह एक-दूसरे को समकोण पर काटते हुए विद्यमान थे। यह तकनीक दर्शाती है कि एक साथ दो अलग-अलग फसलें उगाई जाती थीं।
  • सिंचाई के साधन: चूँकि अधिकांश हड़प्पा स्थल अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में स्थित हैं, इसलिए कृषि के लिए सिंचाई की आवश्यकता पड़ती होगी। अफगानिस्तान में शोर्तुघई नामक हड़प्पा स्थल से नहरों के अवशेष मिले हैं। इसके अलावा, कुओं से प्राप्त पानी का प्रयोग भी सिंचाई के लिए किया जाता होगा। धौलावीरा (गुजरात) में मिले विशाल जलाशयों का प्रयोग संभवतः कृषि के लिए जल संचय हेतु किया जाता था।

भोजन तैयार करने की विधियाँ (Food Preparation Techniques)

भोजन तैयार करने के लिए अनाज पीसने, उन्हें आपस में मिलाने, मिश्रण करने और पकाने के लिए बर्तनों और उपकरणों की आवश्यकता होती थी। इन सभी को पत्थर, धातु तथा मिट्टी से बनाया जाता था। प्रसिद्ध पुरातत्वविद अर्नेस्ट मैके ने मोहनजोदड़ो में अवतल चक्कियों (Saddle querns) की बड़ी संख्या में खोज की। ये चक्कियां आमतौर पर कठोर, कंकरीले या बलुआ पत्थर से बनी थीं और अनाज पीसने का एकमात्र साधन प्रतीत होती हैं। ये मुख्य रूप से दो प्रकार की होती थीं:

  1. वे जिन पर एक छोटा पत्थर आगे-पीछे चलाया जाता था (मुख्यतः अनाज पीसने के लिए)।
  2. वे जिनका प्रयोग संभवतः सालन (तरी) बनाने के लिए जड़ी-बूटियों और मसालों को कूटने के लिए किया जाता था। इन्हें श्रमिकों द्वारा “सालन पत्थर (curry stone)” का नाम दिया गया।

Note: अध्याय के संदर्भ NCERT कक्षा 12वीं की इतिहास की पुस्तक ‘भारतीय इतिहास के कुछ विषय (भाग-1)’ से लिए गए हैं। UPSC सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में इस पुस्तक को आधार माना जाता है और इससे संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

📝

परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तरी (Q&A) - हड़प्पा सभ्यता (भाग 1)

📊 15 प्रश्न 🔀 Shuffled

1 कृषि के लिए जल संचय हेतु जलाशयों (Reservoirs) के प्रमाण किस स्थान पर मिले हैं?

2 मोहनजोदड़ो की बस्ती मुख्य रूप से कितने भागों में विभाजित थी?

3 अब तक भारतीय उपमहाद्वीप में लगभग कितने हड़प्पा पुरातात्विक स्थल खोजे जा चुके हैं?

4 हड़प्पा शहरों में सड़कों और गलियों को किस पद्धति (Pattern) में बनाया गया था?

5 हड़प्पा स्थलों से किन जंगली जानवरों की हड्डियाँ प्राप्त हुई हैं?

6 कृषि सिंचाई के लिए नहरों के अवशेष किस हड़प्पा स्थल से प्राप्त हुए हैं?

7 हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख शहरों में निम्नलिखित में से कौन सा शामिल नहीं है?

8 परिपक्व हड़प्पा (शहरी चरण) का समय काल क्या माना जाता है?

9 कालीबंगन में मिले जुते हुए खेत की क्या विशेषता थी?

10 मोहनजोदड़ो के आवासीय भवनों में 'एकांतता' (Privacy) बनाए रखने की क्या मुख्य विशेषता थी?

11 हड़प्पा सभ्यता के किन स्थलों से मुख्य रूप से बाजरे के दाने प्राप्त हुए हैं?

12 मोहनजोदड़ो में अनाज पीसने के लिए मुख्य रूप से किस उपकरण का प्रयोग किया जाता था?

13 मोहनजोदड़ो के दुर्ग (Citadel) पर स्थित 'विशाल स्नानागार' का प्रयोग संभवतः किसलिए किया जाता था?

14 जुते हुए खेत (Ploughed field) के प्राचीन साक्ष्य किस हड़प्पा स्थल से मिले हैं?

15 मिट्टी से बने हल के प्रतिरूप (मॉडल) कहाँ से मिले हैं?

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लेखक के बारे में

Sudeep Chakravarty

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नमस्कार दोस्तों ! मेरा नाम सुदीप चक्रवर्ती है और मैं बनारस का रहने वाला हूँ । नए-नए विषयो के बारे में पढ़ना, लिखना मुझे पसंद है, और उत्सुक हिंदी के माध्यम से उन विषयो के बारे में सरल भाषा में आप तक पहुंचाने का प्रयास करूँगा।

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