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इतिहास और राजनीती (History and Politics)

हड़प्पा सभ्यता (भाग 4): लिपि, सत्ता, पतन के कारण और पुरातात्विक खोजें

हड़प्पा सभ्यता का प्रशासन कैसा था? क्या वहां कोई राजा था? इतने बड़े पैमाने पर फैले इस साम्राज्य का अंत कैसे हुआ? और इस खोई हुई दुनिया को पुरातत्वविदों ने कैसे वापस खोज निकाला? यह ब्लॉग हड़प्पा की लिपि, उनके प्रशासनिक ढांचे, सभ्यता के रहस्यमय पतन और इसके खोज के इतिहास पर केंद्रित है।

रहस्यमय लिपि और बाट प्रणाली (Enigmatic Script and Weights)

  • लिपि: हड़प्पा की मुहरों पर एक विशिष्ट लिपि पाई गई है जिसे आज तक पढ़ा नहीं जा सका है। यह वर्णमालीय (Alphabetical) नहीं थी, बल्कि इसमें चित्रों और चिह्नों का प्रयोग होता था। इसमें लगभग 375 से 400 तक चिह्न मिले हैं। यह लिपि संभवतः दाईं से बाईं ओर (Right to Left) लिखी जाती थी। मुहरों का उपयोग मुख्य रूप से लंबी दूरी के व्यापार में सामान की सुरक्षा (मुद्रांकन) और प्रेषक की पहचान के लिए किया जाता था।
  • बाट प्रणाली: हड़प्पा की विनिमय प्रणाली बहुत सटीक बाटों द्वारा नियंत्रित थी। ये बाट आमतौर पर ‘चर्ट’ (Chert) नामक पत्थर से बने घनाकार (Cubical) होते थे। बाटों के निचले मानदंड द्विआधारी (Binary – 1, 2, 4, 8, 16… 640) थे, जबकि ऊपरी मानदंड दशमलव प्रणाली का अनुसरण करते थे।

सत्ता और प्रशासन (Authority and Administration)

हड़प्पा समाज में असाधारण एकरूपता (जैसे समान अनुपात की ईंटें, मानकीकृत बाट और मुहरें) यह दर्शाती है कि यहाँ कोई न कोई केंद्रीय सत्ता अवश्य थी।

  • पुरातत्वविदों को मोहनजोदड़ो में एक ‘विशाल भवन’ मिला, लेकिन कोई भव्य वस्तु न मिलने से इसे राजमहल कहना कठिन है।
  • एक पत्थर की मूर्ति को ‘पुरोहित-राजा’ (Priest-King) का नाम दिया गया, क्योंकि इसके लक्षण मेसोपोटामिया के इतिहास से मिलते-जुलते थे।
  • विद्वानों में मतभेद है: कुछ मानते हैं कि सभी समान थे, कोई राजा नहीं था। कुछ मानते हैं कि अलग-अलग नगरों के अलग-अलग शासक थे। जबकि तीसरा (और सबसे तर्कसंगत) मत यह है कि यह एक ही विशाल राज्य था, जहाँ एक लोकतांत्रिक और केंद्रीकृत व्यवस्था के तहत फैसले लिए जाते थे।

सभ्यता का अंत और पतन के कारण (Decline of the Civilization)

लगभग 1800 ईसा पूर्व तक अधिकांश विकसित हड़प्पा स्थलों (जैसे चोलिस्तान) को छोड़ दिया गया था और लोग गुजरात, हरियाणा और पश्चिमी यूपी की नई बस्तियों में बसने लगे। 1900 ईसा पूर्व के बाद इस सभ्यता का शहरी ढांचा बिखर गया और ग्रामीण जीवनशैली (उत्तर हड़प्पा संस्कृति) ने ले ली।

  • पतन के कारण: इसके अंत के कई कारण बताए जाते हैं, जैसे—जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, अत्यधिक बाढ़, नदियों का सूखना या मार्ग बदल लेना और भूमि का अत्यधिक उपयोग। इन सबने मिलकर इस सुदृढ़ सभ्यता का अंत कर दिया।
  • आर्यन आक्रमण का खंडन (DNA Research): पहले माना जाता था कि आर्यों के आक्रमण (इंद्र द्वारा नगरों का विनाश) से यह सभ्यता नष्ट हुई। लेकिन हरियाणा के राखीगढ़ी में हाल ही में मानव कंकालों पर हुए DNA अनुसंधान ने इस सिद्धांत को गलत साबित कर दिया है। इस शोध से पता चला कि हड़प्पावासी भारतीय उपमहाद्वीप के मूल निवासी थे और उनका अनुवांशिक इतिहास बिना किसी बाहरी आक्रमण के 10,000 ईसा पूर्व तक जाता है।

पुरातात्विक खोज का इतिहास (History of Discovery)

इस सभ्यता को खोजने में कई पुरातत्वविदों का योगदान रहा:

  • कनिंघम का भ्रम: भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (ASI) के पहले डायरेक्टर जनरल अलेक्जेंडर कनिंघम (जिन्हें भारतीय पुरातत्व का जनक कहा जाता है) शुरुआती दौर में हड़प्पाई मुहर का महत्व नहीं समझ पाए, क्योंकि उनका ध्यान केवल गंगा घाटी के बाद के इतिहास और चीनी यात्रियों के वृतांतों पर केंद्रित था।
  • सभ्यता की खोज: दयाराम साहनी ने हड़प्पा में और राखल दास बनर्जी ने मोहनजोदड़ो में मुहरें खोजीं। इसके आधार पर 1924 में ASI के महानिदेशक जॉन मार्शल ने पूरी दुनिया के सामने सिंधु घाटी में एक नई सभ्यता की खोज की घोषणा की।
  • नई तकनीक (स्तरीकरण): 1944 में आर.ई.एम. व्हीलर ASI के डायरेक्टर जनरल बने। उन्होंने एक सैन्य अधिकारी की तरह अनुशासन लाया और क्षैतिज खुदाई के बजाय टीले के “स्तर विन्यास” (Stratigraphy) का अनुसरण करने की वैज्ञानिक विधि लागू की।

Note: अध्याय के संदर्भ NCERT कक्षा 12वीं की इतिहास की पुस्तक ‘भारतीय इतिहास के कुछ विषय (भाग-1)’ से लिए गए हैं। UPSC सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में इस पुस्तक को आधार माना जाता है और इससे संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

📝

परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तरी (Q&A) - हड़प्पा सभ्यता (भाग 4)

📊 7 प्रश्न 🔀 Shuffled

1 हड़प्पाई लिपि की सबसे प्रमुख विशेषता क्या है?

2 हड़प्पा सभ्यता के बाटों के निचले मानदंड किस प्रणाली का अनुसरण करते थे?

3 वर्ष 1924 में सिंधु घाटी में एक नई सभ्यता की खोज की घोषणा पूरी दुनिया के सामने किसने की थी?

4 राखीगढ़ी में मानव कंकालों पर किए गए हालिया DNA अनुसंधान से क्या निष्कर्ष निकला?

5 हड़प्पा सभ्यता में बाट (Weights) सामान्यतः किस पत्थर से बनाए जाते थे?

6 किस पुरातत्वविद को 'भारतीय पुरातत्व का जनक' कहा जाता है?

7 टीले के 'स्तर विन्यास' (Stratigraphy) का अनुसरण करने की वैज्ञानिक विधि पुरातत्व में किसने लागू की?

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लेखक के बारे में

Sudeep Chakravarty

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नमस्कार दोस्तों ! मेरा नाम सुदीप चक्रवर्ती है और मैं बनारस का रहने वाला हूँ । नए-नए विषयो के बारे में पढ़ना, लिखना मुझे पसंद है, और उत्सुक हिंदी के माध्यम से उन विषयो के बारे में सरल भाषा में आप तक पहुंचाने का प्रयास करूँगा।

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