क्रिया योग रहस्य (प्रथम एवं द्वितीय भाग) – Kriyā Yoga Rahasya – Book Review in Hindi
| पुस्तक का नाम | क्रिया योग रहस्य (प्रथम एवं द्वितीय भाग) – Kriyā Yoga Rahasya – Book Review in Hindi |

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क्रिया योग रहस्य (प्रथम एवं द्वितीय भाग) – Kriyā Yoga Rahasya – Book Review in Hindi
लेखकः श्री माहेश्वरी प्रसाद दूबे
| प्रकाशक | राजयोग क्रियायोग मिशन |
| पृष्ठों की संख्या | 79 |
| मूल्य | ₹ 100 |
| प्रथम संस्करण | 2020 |
| भाषा | हिन्दी |
क्रियायोग विषय पर अब तक न जाने कितनी पुस्तके लिखी गयी है, और आगे आने वाले समय में कितनी और लिखी जाएँगी । इसमें कोई संशय नहीं है की जो भी साधक क्रियायोग के पथ पर आगे बड़ा है, उसने कभी न कभी श्री परमहंस योगानन्द द्वारा रचित “Autobiography of a Yogi” अवश्य पड़ी होगी, ऐसा मेरा मानना है । उसी प्रकार श्री माहेश्वरी प्रसाद दूबे द्वारा रचित “क्रियायोग-रहस्य” भी क्रिया साधको के लिए एक अमूल्य धरोहर है ।
श्री माहेश्वरी प्रसाद दूबे ने अपनी पुस्तक “क्रियायोग-रहस्य” में ध्यान साधना के दुर्लभ अनुभूतियों को अत्यंत सहज तरीके से लिखा है। पूरी पुस्तक में आरंभ से लेकर अंत तक न तो कहीं भाषा के स्तर पर पांडित्य का प्रदर्शन दिखता है और न ही प्रस्तुति के स्तर पर अतिरिक्त आकर्षण उत्पन्न करने का ही कोई प्रयास है। शब्दों में शिशु-सुलभ सरलता एवं योगी-सुलभ सरस-गांभीर्य दर्शन होता है । महात्मा कबीर की ही तरह मैं कहता आँखन की देखी के अंदाज में दूबे जी ने संभव-सीमा तक अपनी अनुभूतियों की चर्चा की है ।
श्री माहेश्वरी प्रसाद दूबे ने इस पुस्तक की कुछ प्रतियां पहले दो भागो प्रकाशित किया था । बाद में संरक्षण की दृष्टि से इसके पुनः प्रकाशन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी । ऐसे में यह उचित लगा की पुस्तक के दोनों भागो को एकसाथ प्रकाशित किया जाए । वर्तमान में राजयोग क्रियायोग मिशन के द्वारा यह पुस्तक प्रकाशित की जा रही है । इच्छुक पाठक आश्रम के वेबसाइट rykym.org पर पुस्तक प्राप्त करने के लिए संपर्क कर सकते है ।
क्रियायोग सहित किसी भी साधना-पद्धति में लेखकीय दायित्व के निर्वाह के दौरान गोपनीयता का भी ध्यान अवश्य ही रखना होता है। पर इस पुस्तक में क्रिया पद्धतियों सरल शब्दों में विवरण मिलता है, पर लेखक ने सभी पाठको से यह अनुरोध किया है कि वे इस पुस्तक में वर्णित विधियों के आधार पर योगाभ्यास कदापि न करे और क्रिया अभ्यास में किसी क्रियायोग आचार्य की शरण में जाये ।
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